राजा आसा और राजा यहोशापात ने परमेश्वर की व्यवस्था का पालन किया, मूर्तियों को नष्ट किया और विश्वास के साथ शासन किया कि परमेश्वर के साथ सब कुछ संभव है। परिणामस्वरूप, परमेश्वर ने उनके राष्ट्र को शांति, भरपूर आशीष और महिमा प्रदान की।
बाइबल के इतिहास द्वारा, परमेश्वर ने मानवजाति को आशीष पाने का मार्ग दिखाया है। हमें आसा की तरह परमेश्वर को छोडकर शक्तिशाली राष्ट्रों से मदद नहीं मांगनी चाहिए, और न ही यहोशापात की तरह दुष्टों के साथ कोई काम करना चाहिए। क्योंकि जब हम परमेश्वर को भूलकर परिस्थितियों और लोगों पर भरोसा करते हैं, तो वे अपनी आशीषें हटा लेते हैं।
आसा के राज्य के पंद्रहवें वर्ष के तीसरे महीने में वे यरूशलेम में इकट्ठा हुए। उसी समय उन्होंने उस लूट में से जो वे ले आए थे, सात सौ बैल और सात हज़ार भेड़–बकरियाँ, यहोवा को बलि करके चढ़ाईं। उन्होंने वाचा बाँधी कि हम अपने पूरे मन और सारे जीव से अपने पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा की खोज करेंगे; यह शपथ खाकर सब यहूदी आनन्दित हुए, क्योंकि उन्होंने अपने सारे मन से शपथ खाई और बड़ी अभिलाषा से उसको ढूँढ़ा और वह उनको मिला, और यहोवा ने चारों ओर से उन्हें विश्राम दिया। 2 इतिहास 15:10–15
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